बौद्धक गुम्बामे जाइलेल करैछई भोरमे स्नान !
ताहिमे बैठके करैछई सब बहुते ध्यान !
मेलमिलाप से होइछै समाजक उत्थान !
चलु यौँ मिता हमर सुन्दर गाम. !
ताहिमे अटकल छैक हमर प्राण !
सुबहे सुबह होइछैक अल्लाहके अजान !
मस्जिदमे बैठके पर्हैईछैक कुरान !
बहुते खुशिसे मनाबैछइक रमजान !
चलु मिता हमर सुन्दर गाम !
ताहिमे अटकल छैक हमर प्राण !
नज्दिकेमे छैक सिरहा ओर लाहान !
पुरव दिशामे बहैछैइक नदि बलान !
सिरहेमे होइछैक कमला कट्टान !
चलु यौ मिता हमर सुन्दर गाम !
ताहिमे अटकल छै हमर प्राण !
बहुतेक भैयासब करैछईक खेति किसान !
सबके खेतेमे रहैछई खोपरी ओर मचान !
तहिमे करैछई किसानमा भैया सब जलपान !
चलु यौ मिता हमर सुन्दर गाम !
ताहिमे अटकल छै हमर प्राण !
                                                   धन्यवाद !!
                                                लेखकः सन्तोष सिंह

                                    (गोलबजार नंपा १० डण्डाटोल ,सिरहा)

                                      ( हाल न्युयोर्क, अमेरिका कार्यरत)